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सूर्य+शुक्र

भारतीय ज्योतिष मे भदावरी ज्योतिष के प्रयोग भदावरी ज्योतिष मे भगवान सूर्य सूर्य ग्रह के कारकत्व सूर्य के अन्य ग्रहो के साथ कार्य सूर्य+मन्गल सूर्य+बुध सूर्य+गुरु सूर्य+शुक्र सिह का शनि शनि+गुरु+मंगल=आरक्षण श्री गणेशजी प्राण क्या है ? ग्रह भगवान की तरफ़ जाने का रास्ता देते हैं गोचर कैसे काम करता है?



सूर्य+शुक्र
सूर्य को पिता का रूप माना जाता है,सूर्य आत्मा है,सूर्य नाम है,सूर्य जाति है,सूर्य औकात है,सूर्य राम है,सूर्य किशन है,सूर्य अल्लह अहि,सूर्य ईशा है,एक सूर्य के कितने नाम है,भदावरी ज्योतिष मे सूर्य के लिये बहुत ही अच्छे ज्ञान का बोध करवाया गया है,पाप मत करो सूर्य देखता है,दिन के पाप सूर्य देखता है,रात मे सूर्य पुत्र शनि देखते है,सूर्य दिन मे जो उसको देते हो,वही रात मे शनि के ऊपर वह छोड कर कि इसका फल दे देना,शनि जो कि न्याय का देवता है,देता है,चोर को बैचेनी देता है,डकैत को उसकी अचानक मौत देता है,सूर्य आत्मा है,जब भी मन किसी गलत काम को करने की इच्छा करता है तो सूर्य रूपी आत्मा मन को धिक्कारती है,मत करो ऐसा काम बहुत तकलीफ होगी,तुम्हारे शरीर को नही तो किसी के शरीर को तो होगी ही,जब शरीर अलग और सबकी आत्मा एक है,तो दुख तो तुम्हे भी मिलेगा,समय का पता नही,कब दुख मिलता है,सूर्य पिता है तो शुक्र पिता के द्वारा बनाया गया मकान है,शुक्र पूंजी है,माया है,सूर्य स्वर्ण है,तो  शुक्र उनको सजावटी आभूषण बना कर शरीर को सजाने का काम करता है,सूर्य मकान की लकडी है फरनीचर है तो शुक्र उसको सजावटी रूप देकर कलाकारी का परिचय देता है,शुक्र सजाता है,शाही रूप से सजाता है,पहले भाव मे सूर्य शुक्र दोनो मिलकर पत्नी को अहम देता है,स्त्री के पहले भाव मे स्वर्णाभूषण से सजा कर रखता है,शनि की नजर होती है तो स्वर्ण की कलाकारी और आभूषण बनाने के बाद मजदूरी देता है,बुध साथ होता है,तो सोने के गहनो का व्यापार करवाता है,लकडी की पहिचान करने वाला बनाता है,सूर्य गर्मी है,शुक्र पुरुष का वीर्य है,पत्नी की गर्भाशय की गर्मी से वीर्य जलता है और गर्भपात हो जाता है,सन्तान कम होती है,स्त्री की कुन्डली मे शुक्र बडी बहिन है,जिसके वश मे ही रह कर पूरी जिन्दगी बितानी पडती है,जातक को राज्य से धन की प्राप्ति भी शुक्र करवाता है,गुरु की तरह से शुक्र भी राजा है,सूर्य के साथ मिलकर राज्य की खेती वाली जमीन को संभालने का काम भी सौंपता है,सामाजिक रूप से जिम्मेदारी देता है,प्यार की परिभाषा देता है,समाज से ताकत भी देता है,पत्नी को राज्याधिकार देता है,दोनो मिलकर एक चुम्बकीय आकर्षण देते है,सम्मोहन से लोग अपने आप ही खिंचे चले आते है,जन्म जात लोगो के लिये दया का भाव भी देते है,सूर्य शुक्र दोनो मिलकर भावुकता भी देते है,एक परिपक्क्व स्वाद भी देते है,जिसके द्वारा जिन्दगी की हकीकत को बता कर लोगो को समझाया जावे,अफेक्सन देकर योग्यता का भाव प्रदान करते है,दोस्ती करने का भाव भी मिलता है,वह दोस्ती जिसे लोग शाही दोस्ती के नाम से जानते है,लैला मंजनू का प्यार भी सूर्य शुक्र का मिलन था,राजसी प्रेयसी की परिभाषा को दोनो ग्रहो ने मिलकर ही प्रदान किया था,शाही खजाना भी दोनो की देन है,औरत की कुन्डली मे पेशाब वाली बीमारिया भी देता है अगर कही जरा सा भी राहु का योगदान हो जाये तो,सामाजिक महानता भी दोनो ग्रह देते है । भदावरी ज्योतिष कहती है कि दोनो की युती पहले घर मे ठीक नही होती है,कारण कि जातक के जीवन साथी को कभी चैन नही आता है,उसकी किस्मत जातक के साथ आते ही दोनो की सोच मे जमीन आसमान का अन्तर हो जाता है,लगन मे दोनो पोजिटिव सोचते है और जीवन साथी के लिये दोनो ही निगेटिव बन जाते है,परिणामस्वरूप ग्रह्स्थ जीवन खराब हो जाता है,और शादी के बाद जैसे ही प्रेम कहानी किसी और से बनी कि सीधा ममला फैमली कोर्ट मे चला जाता है,राहु या केतु की नजर जैसे ही पडी,मतलब घर मे ससुराल पक्ष का कोई साला आदि आकर रहने लगा,या फिर कोई दोस्त घर मे आकर बैठने लगा,और किसी न किसी बहाने से पत्नी को पर्चेजिन्ग करवाने लगा,समझो जीवन की गाडी शक के दायरे मे फ़ौरन आजाएगी,आप पास के लोगो मे राजनीति बनने लगेगी,किस फ़लां की पत्नी फ़लां के साथ फ़लां जगह पर देखी गई थी,या फ़लां आदमी फ़लां औरत के साथ फ़लां रेस्टोरेन्ट मे मौज कर रहे थे,मानसिक रूप से प्रताडित रहने के कारण पति या पत्नी शरीर से हमेशा बीमार ही बनी रहेगी,साथ ही सूर्य के द्वारा वीर्य के जलने से लगातार गर्भ पात होने से भी शरीर मे खून की कमी हो जायेगी,परिणाम वही कि लगातार बीमारी और अस्पतालो के चक्कर,इस हालत मे अगर कोई पति अपनी पत्नी के अलावा किसी भी तरह से लव अफेयर के चक्कर मे आया कि जेल की हवा खाने के लिये मजबूर होना पडेगा.साथ ही दोनो ग्रहो की युती अगर दूसरे भाव मे है तो घर मे महिलाओ की कमी आजाती है,पुरुष तो जादा हो जाते है और औरतो मे कमी हो जाती है,जातक या तो सवारी का आनन्द लेले या फिर पत्नी या पति का,साले या भान्जे अथवा मामा से सम्बन्ध बन जावे तो घर की औरतो मे और धन के साथ जो भी जमा पूंजी है,सबका हाल बुरा हो जाता है,छोटी बहिने या भाई कुआंरे ही रह जाते है,शादी भी हो जावे तो विधवा या रडुआ भी हो रह्जाते है,पिताजी इतने कन्जूस हो जाते है कि एक रुपया की जगह चार आने ही खर्च करने के लिये देते है,पत्नी या जमीन के झगडे बढ जाते है,और इन झगडो के कारण जातक के पास बरबादी के अलावा और कोई रास्ता नही होता है । लेकिन यही युती अगर किसी प्रकार से कुन्डली के नवे भाव मे हो जाती है,तो फिर तो जातक की बल्ले बल्ले हो जाती है,इतना धन फट पडता है कि सम्भाले नही सम्भलता है,और अपनी उम्र की बीस या इक्कीस साल की उम्र से ही जातक को कितनी ही लम्बी यात्राये धर्म के प्रति करनी पडती है,यह वह ही जानता है । साथ ही दसवे घर मे यह युती हो जाने पर पत्नी तो राजा बन जाती है,और जातक श्री मती प्रतिभा पाटिल के पति श्री देवी सिह की तरह से साथ साथ जाने से अपने मन मे हीन भावना को पाल कर बैठ जाता है ।