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सूर्य+गुरु

भारतीय ज्योतिष मे भदावरी ज्योतिष के प्रयोग भदावरी ज्योतिष मे भगवान सूर्य सूर्य ग्रह के कारकत्व सूर्य के अन्य ग्रहो के साथ कार्य सूर्य+मन्गल सूर्य+बुध सूर्य+गुरु सूर्य+शुक्र सिह का शनि शनि+गुरु+मंगल=आरक्षण श्री गणेशजी प्राण क्या है ? ग्रह भगवान की तरफ़ जाने का रास्ता देते हैं गोचर कैसे काम करता है?



सूर्य+गुरु
सूर्य आत्मा है और गुरु जीव है,अत: जीवात्मा योग बन जाता है । जन्म ईश्वर अंश से होता है,साथ ही माना जाता है कि परिवार का ही कोई पुराना बुजुर्ग फिर से परिवार के छूटे हुए कामो को करने के लिये आया है,अधिकतर कथाओं मे कहा जाता है कि मरने के बाद जब आत्मा ईश्वर के पास जाती है तो धर्मराज के न्याय करते वक्त जीवात्मा किन्हीं कारणों से मोक्ष को प्राप्त नही कर पाती है,जब धर्म का पलडा भारी होता है,तो धर्मराज वापस से उसी परिवार मे उस जातक को भेजते है,और वह जातक ईश्वरीय आदेश से अपने को परोपकारी बना कर खूब दान पुण्य करने लगता है,उसके दान पुण्य को देखते हुए कितने ही लोग इस बात का बुरा मनते है कि यह व्यक्ति अपने कारणो से अपने माता पिता की पूंजी को उडाये दे रहा है,मगर उसे इन बातो का कोई असर नही होता है,वह अपने कामो मे लगा रहता है,जैसे ही उसके पुण्य पूरे हो जाते है,वह वापस से धर्मराज के पास जाकर अपनी करनी का लेखा जोखा,मौत के बाद प्रस्तुत करता है,और पुण्य कार्य पूरे होते ही वह आवागमन के चक्र से छूट जाता है । जातक कीकुन्डली मे सूर्य गुरु की युती होने के कारण भदावरी ज्योतिष के अनुसार जातक अपने को समाज मे मशहूर कर लेता है,किसी को किसी बात की जरूरत होते ही,वह्जातक के पास भागता है और उसके द्वारा सहायता लेने के बाद उसका गुण गान पूरे समाज मे करता है,इस प्रकार से जातक की कीर्ति समाज और संसार मे फैलती चली जाती है,आज भी यदा कदा ऐसे लोग मिल जायेंगे,जिनका काम ही लोगों की सहायता करना होता है । सूर्य से पिता का भान किया जाता है,जातक का पिता भी इन पदवियो से सुशोभित होता है,कबीरदास जी ने कहा भी है कि जब आदमी की आदत दान करने की हो जाती है,तो उसके पास अपने आप ही ईश्वर धन की बौछार करने लगता है,यथा- पानी बाढे नाव मे,घर मे बाढे दाम,दूओ हाथ उलीचिये यह सज्जन को काम । वास्तव मे सही भी है,कि अगर मेहनत करने से कोई अमीर बनता तो,वह मजदूर अमीर बन जाता जो दिन भर मेहनत से पत्थर तोडता है,शिक्षा से कोई अमीर बनता तो आज कितने ही शिक्षित बेरोजगार आपको रिक्शा चलाते मिल जायेंगे,और पूजा पाठ से कोई अमीर बनता तो संसार मे जितने भी पुजारी है,वे अमीर बन कर खुद लोगो की पूजा पाठ नही करते,आदमी अमीर केवल दान और पुण्य कर्मो से ही बनता है । मैने खुद इस बात को प्रयोग करने के बाद देखा है,जब मेरी भावना होती है कि अपना पेट काट कर लोगों की भलाई बाले काम किये जायें,तो धन अपने आप ही आता है,मेरे पास ही एक गरीब परिवार रहता है,उनके पांच लडकियां है,बाप को बचपन से ही शराब कबाब मे घुसने के कारण अपने परिवार से कोई लगाव नही रह गया,उसने अपनी पत्नी को शराब के नशे में भोगा और बदले में पत्नी के पुत्रियां होती गई,पुत्रियां जब जवान हो गई तो,बाप को तो कोई चिन्ता थी नही,माता को चिन्ता लगी रहती थी,किसी के कहने पर वह मेरे पास आयी और रोने लगी,समय कुन्डली देखने के बाद मिला कि वह अपने को समाज की बातो से प्रताडित होकर आत्महत्या करना चाहती है,जब इस प्रकार की शनि केतु की युती प्रश्न कुन्डली के बारह्वे भाव मे मिलती हो तो अच्छे अच्छे ज्योतिषी घबडा जाते है,मेरा भी घबडाना मुनासिब था,बचाने का एक ही तरीका कि उसकी सहायता की जावे,बडी पुत्री के लिये मैने कह दिया कि वर को ढूंडो,शादी मै कर दूंगा,शर्त यह कि कन्या दान मै करूंगा,वह औरत चली गई,और एक महिने के बाद ही मेरे पास आयी,और कहने लगी भदौरियाजी मैने लडका देख लिया है,लडके की जन्म तारीख और लडकी की जन्म तारीख मिला कर देखी,बहुत ही सुन्दर जोडी बन रही थी,मैने उनको शादी की तिथि निकाल कर दे दी,शादी की तारीख बारह नबम्बर दो हजार पांच की निकली,लडकी को वह औरत मेरे घर पर एक हफ़्ता पहले ही ले आयी,अपनी पत्नी से कहा कि शादी करने की हा तो करली है,पैसा का इंतजाम कैसे होगा,वह भी चिंता मे पड गई,मेरा काम है जब कोई विशेष समस्या आजाती है तो अपने पूजा रूम मे भगवान से कह देता हूं,यही बात मैने तब की,शादी की तारीख नजदीक आती गई,शादी की तारीख से तीन दिन पहले पत्नी का पोस्ट आफ़िस मे जमा पैसे को जिसकी एफ़ डी का समय पूरा हो गया था,देने के लिये पोस्ट आफ़िस का आदमी आया,कुल पूंजी बीस हजार थी,पत्नी ने अपने लिये उस पैसे को इसलिये जमा किया था,कि मकान के ऊपर लोहे की चद्दर डालने से आने जाने बाले धूप से बचा कर बैठ सकेंगे,उस पैसे को खर्च करने के बाद बर्तन और पलंग आदि सामान लाया गया,शादी के एक दिन पहले जोधपुर से एक सज्जन आये और कहने लगे भदौरियाजी आपके पास एक ही डाली मे लगा,एक मुखी रुद्राक्ष का जोडा है,मेरे पास था,मैने हा कर दी,वे बोले कितनी कीमत का है,मैने कहा कि एक लडकी की शादी करनी है,इतनी ही कीमत चाहिये,उन्होने पेंतीस ह्जार अपनी जेब से निकाले,और देकर वे उस रुद्राक्ष के जोडे को ले गये,शादी मे मैने कोई कमी नही रखी,जितना सोचा था,उससे भी अधिक हो गया,जो भी लोकल जान पहिचान वाले थे वे सभी कोई ना कोई गिफ़्ट लेकर उस कन्या के लिये आये थे,शादी बहुत ही धूम धाम से हो गई,शादी के करने के बाद उस लडकी का बाप मेरे सामने फ़ूट फ़ूट कर रोने लगा,मैने उससे यही कहा कि शराब छोड दो फ़िर मेरे से बात करना,पता नही क्या असर मेरी बात का हुआ,उसने उसी शादी के दिन से शराब भी छोड दी,आप उस लडकी की शादी की तस्वीरें इस बेब साइट पर देख सकते है,यह याहू की जियोसिटी पर बना कर दाली है-http://www.geocities.com/poonamjitendra12112005/marrige1.html इस काम को करने के बाद पता नही किस प्रकार से लोगो का रैला मेरे पास दो महिनो मे आया,कि बिना मेरे कुछ लिये और मागे,मेरे मन्दिर मे इतना पैसा चढा गया,कि चद्दर भी लग गई,और तीन कन्याओ की शादी भी मैने और दूसरे लोगो की करदी ।