सूर्य+बुध
भारतीय ज्योतिष मे भदावरी ज्योतिष के प्रयोग
भदावरी ज्योतिष मे भगवान सूर्य
सूर्य ग्रह के कारकत्व
सूर्य के अन्य ग्रहो के साथ कार्य
सूर्य+मन्गल
सूर्य+बुध
सूर्य+गुरु
सूर्य+शुक्र
सिह का शनि
शनि+गुरु+मंगल=आरक्षण
श्री गणेशजी
प्राण क्या है ?
ग्रह भगवान की तरफ़ जाने का रास्ता देते हैं
गोचर कैसे काम करता है?
बुध का मतलब तो सभी जानते है,गुरु पत्नी तारा को चन्द्रमा लेकर भाग गया था,देवताओ ने न्याय के लिये सभा की,गुरु पत्नी को वापस तो किया गया,मगर एक ऐसे पुत्र के साथ जो चन्द्रमा और तारा के अवैद्य सम्बन्धो से पैदा हुआ था,अक्सर देखा जाता है कि जो भी अवैद्य सम्बन्धो से पैदा होता है बहुत ही चालाक किस्म का इस्न्सान होता है,उसको मान मर्यादा का कतई ग्यान नही होता है,वह अपने लिये खुद के कानून बनाता है,क्योकि उसको बाकी कानून जो समाज मे चल रहे होते है,मान्यता नही देतेहै,अपने ही कानूनो पर चलता है और अपनी कानूनो के चक्कर मे फसकर मर जाता है । साथ ही समाज मे चलती हुई बातो के चक्कर मे उसका ध्यान हमेशा कौन क्या कहता है की तरफ़ रहने से वह दूसरो की बातो का मनन करता रहता है,और मनन करते रहने से उसकी दूसरी भाषाओ,कहने बाली बातो के बाद उनका निश्कर्ष निकालने की कला अपने आप ही आ जाती है,वह कितनी ही जबानो का मालिक बन जाता है,वह सूत्रो को अपने मन मे रख लेता है,और समय पडने पर उन सूत्रो के द्वारा ही उन बातो का विवेचन कर देता है जो कि उसने पिछले समय मे सीखी थी,बुध जुबान का कारक भी है,आपने वैश्या पुत्रो को या उनकी पुत्रिओ को जरूर देखा होगा,वे अपने माहौल मे पल कर औए लगातार फसाने वाली बातो को सुनकर अपने आप ही अपने ग्राहको को फसा लेते है,और अधिक बात करके केवल बातो के पुलिन्दे बान्ध कर सामने बाले को इतना इम्प्रेस कर लेते है कि कोई अपने बचाव का रास्ता ही नही ढून्ढ पाता है और फस कर अपने आपको असहाय बना लेता है,संसार की बातो को जानने के लिये बुध प्रधान व्यक्ति अपने पास हमेशा फोन,इंटरनेट,और जो भी तरीके है रखने की कोशिश करता है,तुलसीदासजी ने रामायण मे कहा है,कि पंडित सोइ जो गाल बजावा,अपने आप को बातो के द्वारा संसार की बातो का ज्ञान रखने के बाद वह बिना अंदरूनी आवाज के भोंपू की तरह से बजा करता है,सूर्य पिता है,और बुध ज्ञानी है,अत: पिता पुत्र का साथ ज्ञान योग के साथ है,अधिक बोलने और बातों के छल्ले बनाने के कारण समाज में प्रतिष्ठत है । वेदो को पढ कर बुध प्रधान जातक उन पर चलता तो नही है,मगर उसमे उपदेश देने की कला आजाती है,और बहुत ही संगीत आदि के साथ गाना बजाना करके अपने को प्रसिद्ध कर लेता है । अधिक गाना बजाना जानने के कारण स्त्री जातक उसके आस पास उसकी कला पर मोहित होकर जान देने लगते है,और कितने ही प्रकार के लोगो से,समाजो मे भ्रष्ट पुरुषो और औरतो के चक्कर मे अपने को अधिक वासना युक्त बना लेता है । जिस प्रकार से जातक के आस पास स्त्रियो का ठक्ठेला लगा रहता है,और जातक उनको भोगता है,उसी प्रकार से उसकी रुचि जमीन इकट्ठी करने मे अधिक होती है,जमीन पर वह तरह तरह के भवन बना कर,उनको स्त्रिओ की भांति सजाकर किराये पर देता है,और किराया आदि उसी प्रकार से एकत्रित करता है जिस प्रकार से वैश्या के कोठे पर रहने वाला दलाल लोगो से अपने उदर पोषण के लिये धन इकट्ठा करता रहता है । पिता के पास बहने भी अधिक होती है,यह युती सूर्य बुध के बारह्वे भाव मे हो तो अधिक चान्स बन जाते है,बहिनो की संख्या अधिक होने के कारण,पिता का पालन पोषण तो ठीक से होता है,मगर पिता के माता पिता के द्वारा बहिनो की शादी और उनके रिस्तो मे बनाव बिगडाव चलते रहने से वे परेशान रहते है,पिता की बहिने रिस्ते जल्दी नही होने के कारण अपनी वासना की भूख मिटाने के लिये अपने आस पास के जवान लोगो को देखती है,और गुप चुप रूप से चलने वाले इन अवैद्य सम्बन्धो के कारण जातक का मन भी इन बातो मे जाता है,और वह अपने को अपनी पत्नी के अलावा अन्य औरतो से अपनी काम क्रिया को अवैद्य बना लेता है । गाने बजाने का व्यापार,आज के युग मे सीडी,वीडिओ और सिनेमा जैसे काम उसकी पसन्द के हो जाते हैं ।

