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भदावरी ज्योतिष मे भगवान सूर्य

भदावरी ज्योतिष मे भगवान सूर्य

भारतीय ज्योतिष मे भदावरी ज्योतिष के प्रयोग भदावरी ज्योतिष मे भगवान सूर्य सूर्य ग्रह के कारकत्व सूर्य के अन्य ग्रहो के साथ कार्य सूर्य+मन्गल सूर्य+बुध सूर्य+गुरु सूर्य+शुक्र सिह का शनि शनि+गुरु+मंगल=आरक्षण श्री गणेशजी प्राण क्या है ? ग्रह भगवान की तरफ़ जाने का रास्ता देते हैं गोचर कैसे काम करता है?



सूर्य आत्मा जगतस्त्थुषच-रिग्वेद

ज्योतिषान्रविरन्सुमान-गीता

वेदो मे सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया है,सूर्य से ही इस जगत का जीवन है,यह एक सर्वमान्य सत्य है,वैदिक काल मे आर्य सूर्य को ही सारे जगत का कर्ता दर्ता मनते थे । सूर्य का शब्दार्थ है सर्व प्रेरक, यह सर्व प्रकाशक सर्व प्रेरक,और सर्व प्रवर्तक होने से कल्यणकारी है,इस बात को सभी जानते है,रिगवेद के देवताओ मे सूर्य का महत्वपूर्ण स्थान है,यजुरवेद मे चक्षो सूर्यो जायत,कह कर सूर्य को ही नेत्र माना गया है । छान्दोग्यपनिषद सूर्य को प्रणव निरूपित कर उनकी ध्यान साधना से पुत्र प्राप्ति का लाभ बताया गया है,ब्रह्मवैवर्त पुराण मे तो सूर्य को परमात्मा का प्रति रूप कहा गया है,सन्सार प्रसिद्ध गायत्री सूर्य से ही पूरित है,सूर्योपनिषद मे सूर्य को ही सम्पूर्ण जगत की आत्मा और जगत की उत्पत्ति का आधार बताया गया है,सूर्योपनि्षद की श्रुति के अनुसार सम्पूर्ण जगत की स्रष्टि तथा पालन सूर्य ही करते है,सूर्य ही सम्पूर्ण जगत की आत्मा है । इसमे कोई अनौखी बात नही है कि सूर्य की उपासना पूजा पाठ का प्रचलन वैदिक काल से ही चला आ रहा है । पहले सूर्य उपासना केवल मन्त्रो से ही होती थी,बाद मे कितने ही सूर्य मन्दिरो के बन जाने से मन्दिरो मे सूर्य उपासना होने लगी है । भविष्य पुराण मे ब्रहमा विष्णु के मध्य एक सम्वाद मे सूर्य पूजा एवम मन्दिर निरमाण का महत्व समझाया गया है । अनेक पुराणो मे आख्यान मिलता है,कि श्री क्रिशन के पुत्र साम्ब को दुर्वासा ने शाप दिया था,और वे कुष्ठ रोग से पीडित हो गये थे,बाद मे साम्ब ने सूर्य आराधना करने के बाद कुष्ठ रोग से मुक्ति पायी थी । प्राचीन काल से ही सूर्य मन्दिर भारत मे बने हुए थे,जिनमे आज भी कोणार्क का सूर्य मन्दिर जैसे जगत प्रसिद्ध है । वै्दिक साहित्य मे ही नही,आयुर्वेद,ज्योतिष,हस्त रेखा,आदि जैसे ग्रन्थो मे सूर्य का महत्व प्रतिपादित किया गया है ।

खगोलीय विग्यान मे सूर्य

सूर्य और भूमि के बीच की दूरी ९,२७,५७,२०९ मील है,सूर्य का व्यास ८,६५ ००० मील है । भूमि से सूर्य का आयतन तेरह लाख गुना,तथा परिमाण तीन लाख तेतीस हजार गुना है,सूर्य का नाभिकीय तापमान ४,००,००,००० फ़ोरन्हीट है । सूर्य स्वम मे प्रकाशित ग्रह है और चन्द्र भूमि सभी को प्रकाश देता है,ऊर्जा भी सूर्य से ही मिलती है,सूर्य के ताप न मिलने से हाड्रोजन और आक्सीजन दोनो मिलकर जम जाते है,सूर्य को एक गैस पिन्ड भी माना जाता है । ज्योतिष मे सूर्य को आत्मा का कारक माना जाता है, सूर्य के नक्षत्र क्रतिका,उत्तराषाढ,और उत्तराफ़ाल्गुनी है,भचक्र से यह काल पुरुष की पान्चवी राशि सिह का मालिक है,पुराणो के अनुसार सूर्य मधु,पिन्गल,नेत्र अस्य चतुरस्य देह,शुचि पित्त प्रक्रति,बुद्धिमान,अल्प्केशी पुरुष ग्रह है,कल्याण कर्ता सूर्य को सुन्दर स्वरूप,गम्भीर स्वर,सम शरीर,शूर,प्रतापी,और स्थिर बताया है । भारतीय ज्योतिष मे सूर्य को पाप ग्रह और क्रूर ग्रह की उपाधि देते है,वेस्ट्रन आस्ट्रोलोजी मे सेफ़ेरियल सूर्य को शुभ मानते है,कुन्डली मे सूर्य को लगन,नवम और दसम भाव का स्थिर कारक माना गया है ।