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भारतीय ज्योतिष मे भदावरी ज्योतिष के प्रयोग

भारतीय ज्योतिष मे भदावरी ज्योतिष के प्रयोग

भारतीय ज्योतिष मे भदावरी ज्योतिष के प्रयोग भदावरी ज्योतिष मे भगवान सूर्य सूर्य ग्रह के कारकत्व सूर्य के अन्य ग्रहो के साथ कार्य सूर्य+मन्गल सूर्य+बुध सूर्य+गुरु सूर्य+शुक्र सिह का शनि शनि+गुरु+मंगल=आरक्षण श्री गणेशजी प्राण क्या है ? ग्रह भगवान की तरफ़ जाने का रास्ता देते हैं गोचर कैसे काम करता है?

रामेन्द्र सिह भदौरिया का ज्योतिष मे योगदान

भारतीय ज्योतिष के प्रति समर्पण

जीवन एक बहुत ही अमूल्य है,और इसकी कीमत आज तक कोई नही लगा सका है । साथ ही जो जन्म लेता है वह मरता भी है,दो ही अवस्थाये है,तीसरी अवस्था जो बीच मे होती है,वही जीने वाली जिन्दगी कहलाती है,जीवात्मा ही जीवन है जो कर्म बन्धन मे बन्ध कर जीने के लिये इस सन्सार मे आती है। और अपने पिछले कर्मो के अनुसार कर्म फलभोगने के लिये इस सन्सार की यात्रा करती है,भगवान श्री श्याम सुन्दर ने कहा है कि आत्मा तो अविनाशी है,आत्मा कभी मरती नही है,शरीर तो एक कपडे की भान्ति है,जो पुराना हो कर बदल दिया जाता है,ज्योतिष शास्त्र के बनाने वाले श्री भ्रगु रिशी ने कहा है कि जीवन मे किये जाने वाले कर्मो को भोगने के लिये आत्मा को शरीर धारण कर्ना पडता है.आत्मा उसी शरीर मे आती है जिसकी पिछले जन्म मे चाहत रही हो,अन्त गति सो मति के अनुसार जीव को वही फल भोगने के लिये आना पडता है जिसकी पिछले जन्म मे भोग बकाया रह गये थे.आत्मा जब दिखाई देती है तो शरीर धारण कर लेती है,और जब उसे कुछ समय के लिये विश्राम लेना होता है तो वह दिखाई नही देती है,तीन तरह के कारण इस आतमा को भोगने पडते है,सत रज और तम,सात्विक धर्म के अनुसार चलने पर रज और तम की सम्भावना नही रहती है,साथ ही तामसिक भावना आने के बाद मानव अपने को सत के मार्ग पर चलने पर तामसिक कारणो को छोड सकता है ।

शन्सार मे जो भी आया है वह बिना काम किये रह नही सकता है,जीना है तो सीना है,काम तो करना ही पडेगा,कोई सत मार्ग पर चल कर सात्विक काम करता है,तो कोई तामसिक भावना मे रह कर तामसिक काम करेगा,राजसिक काम करने के बाद नारकीय जीवन जीना पडेगा,कहा भी गया है कि तप कर राज और राज कर नरक । 

भदावरी ज्योतिष के अनुसार ग्रहो की कमजोरी मे प्रयोग की जाने वाली देशी जडी-बूटिया

ज्योतिष मे किसी ग्रह की कमजोरी मे लोग महन्गे रत्नो की तरफ़ इशारा करते है,मगर भदावरी ज्योतिष मे ग्रह की कमजोरी के लिये जडी बूटियो की सहायता लेते है.ये जडी बूटिया बहुत ही काम करती है,और इनको परखने के लिए किसी जौहरी के पास भी नही जाना पडता है,साथ ही जो ग्रह कमजोर होता है और उस ग्रह की बीमारी मे रत्न तो खाया नही जा सकता है,जबकि जडी बूटी को खा कर भी ग्रह की कमजोरी को शरीर से दूर किया जा सकता है,जडी बूटियो के लिये उनको प्रयोग करने का समय भी रत्नो की तरह से देखना पडता है,और रत्न की तरह धारण करने के बाद जो लोग पढे लिखे नही है,वे बिना किसी पूजा पाठ के जडी बूटी को पहिन सकते है,मगर ध्यान यह रखना पडता है कि ग्रह की कमजोरी कब तक चलेगी,जैसे ही ग्रह की कमजोरी खत्म होती है,जडी का काम खत्म हो जाता है,फिर वह उसी प्रकार से है,जैसे कि बिना सिर दर्द के सिर दर्द की दवा को खाया जाये,इन जडी बूटियो के नाम और उनके पहिनने के समय इस प्रकार से है:-

सूर्य ग्रह की कमजोरी के लिये:-बील जिसके पत्ते भगवान शिव पर चढाये जाते है,की जड को रविवार के दिन जब हस्त या क्रितिका नक्षत्र हो उस दिन लाकर,या पहले से ही इसको इस नक्षत्र मे लाकर रख लेना चाहिये,और जब धारण करनी हो तभी,इस नक्षत्र को देख कर लाल रन्ग के धागे मे बान्ध कर अपने गले मे या पुरुष अपनी दायी भुजा मे और औरत अपनी बायी भुजा मे बान्ध सकते है,सूर्य बाली किसी बीमारी मे बील की जड को इन नक्षत्रो मे लाकर महीन पीस कर दिन मे तीन बार रोजाना तेतालीस दिन तक प्रयोग करना चाहिये. चन्द्र ग्रह की कमजोरी के लिये:-खिन्नी की जड को सोमवार को रोहिणी नक्षत्र मे सफ़ेद धागे मे सूर्य की जड के अनुसार स्त्री और पुरुष दोनो धारण करे,खिन्नी एक अनाज होता है,जो कानपुर और बान्दा जिले मे खूब होती है,लोग इसको भून कर मक्के की खील की तरह से खूब खाते है.

मन्गल ग्रह की कमजोरी के लिये:-अनन्त मूल की जड को मन्गलवार को म्रग्सिरा नक्षत्र मे लाल रन्ग के धागे मे बान्धना चाहिये,मन्गल की किसी भी बीमारी मे भी इसका प्रयोग किया जा सकता है,मगर ध्यान यह रखना चाहिये कि शुगर वाली बीमारियो मे खेजडे की जड को साथ मे खाना चाहिये,और कोई न कोई मीठी चीज का मन्दिरो मे दान करते रहना चाहिये,अगर कोई मीठा प्रसाद दे तो नही लेना चाहिये.

बुध ग्रह की कमजोरी के लिये:-बिधारा की जड को बुधवार को अशलेशा नक्षत्र को हरे रन्ग के धागे मे उपरोक्त तरीके से बान्धना चाहिये.बिधारा आयुर्वेद मे बहुत ही ग्यान दायक बूटी मानी जाती है,कमजोर बुध मे बुद्धि की कमजोरी के लिये,पागल पन और गणित तथा दूसरी भाषाओ के ग्यान के लिये बिधारा बहुत ही मह्त्वपूर्ण है.

गुरु ग्रह की कमजोरी के लिये:-नारन्गी जिसे सन्तरा भी कहते है,या केले की जड को गुरुवार के दिन पुनर्वसु नक्षत्र मे पीले रन्ग के धागे मे धारण करना चाहिये,जिन लोगो का गुरु कमजोर हो वे सन्तरे का प्रयोग खाना खाने के बाद करते रहे.मन्दिरो मे गुरु की कमजोरी के लिये ही केले चढाये जाते है,मगर आजकल लोग केले को केतु का फल भी मनते है,उसका कारण है कि केले की जड तो गुरु की होती है,पत्ता बुध का होता है,फल केतु का होता है,फूल राहु का होता है,घर मे केले के पेड को नही लगाना चाहिये,कारण कि केला रहे अकेला.

शुक्र ग्रह की कमजोरी के लिये:-शुक्रवार के दिन भरणी नक्षत्र मे सर्पोन्खा की जड को सफ़ेद धागे मे बान्धने से शुक्र ग्रह के दोष शान्त होते है,जिस किसी के पुत्र नही होता हो,या सन्तान की बाधा मे पुरुष या स्त्री कमजोर हो,वीर्याणु या स्त्रियो मे शुक्राणु कमजोर हो वे सरपोन्खा की जड की चाय बना कर शाम को सोते समय लेना चालू करे तो निश्चित रूप से पुत्र या सन्तान की प्राप्ति होती है,कोर्थ गाव जो आगरा जिला मे है,मेरा ही गाव है,मैने स्वर्गीय राजा सिह को यह दवा बताई थी,उन्होने अपनी दोनो बहुओ को बताई तो वे सरपोन्खा की गन्ध से उबकाइया लेने लगी,मैने उनको सुझाव दिया कि सरपोन्खा की लकडी से घर मे रोटी पकाने पकाने और रोटी को पति और पत्नी के द्वारा खाने पर सन्तान जितनी चाहो,उतनी मिल जाती है,उनके घर के आस पास सरपोन्खा खूब उगता था,गायो को भी सरपोन्खा चारे मे दिया जाता था,गाये जल्दी ही पनपने लगती थी और उनके आज दो पुत्रो मे आठ लडके और चार लडकिया है,उनका द्वार आज भी गायो के शोर से गून्जता है। शनि ग्रह की कमजोरी के लिये:-भदावर मे बिच्छू नामक घास का पेड बरसात के दिनो मे खूब उगता है,क्वार के महिने मे गुलाबी रन्ग के फूल आते है,और दिवाली के आस पास काले रन्ग के बिच्छू जैसे बीज जिनमे दो नुकीले कान्टे बिच्छू की तरह से मुडे होते है,को शनिवार के दिन काले रन्ग के धागे मे बान्धना चाहिये,शनि से चर्म रोग होते है,बिच्छू की जड को केन्सर जो कि मन्गल और शनि की युती से होता है,को अनन्तमूल की जड के साथ पीस कर तेतालीस दिन तक रोज साम को एक तोला गुड के साथ खाने से ठीक हो जाता है.

राहु की कमजोरी के लिये:-सफ़ेद चन्दन जो घिस कर माथे मे तिलक की जगह पर लगाया जाता है,को बुधवार की आधी रात मे आर्द्रा नक्षत्र मे काले मे बान्धना चाहिये,साथ ही राहु जैसे रोगो मे जिनमे पागलपन,हिस्टीरिया,मिरगी,और भूत प्रेत बाले रोगो मे सफ़ेद चन्दन को घिस कर पानी के साथ पीने से और माथे मे लगाने से राहत मिल जाती है,जिनके लगन मे राहु और सूर्य हो,वे लोग लाल चन्दन को रोजाना घिस कर माथे पर लगावे तो तुरत ही आराम मिल जाता है.

केतु की कमजोरी के लिये:-असगन्ध की जड को मन्गलवार की रात मे अश्विनी नक्षत्र मे काले धागे मे बान्धना चाहिये,जोडो के रोग और पेट के रोगो के लिये जिनमे आन्तो के रोग भी शामिल है,असगन्ध के चूर्ण को लेते रहने से आराम मिलता है. आपको अगर किसी प्रकार से किसी भी जद को प्राप्त करने मे असुविधा हो तो आप सीधे हमे लिखे,हम आपके लिये जरूर भेजेन्गे,मगाने से पहले आप इस पते पर भारत मे दो सौ रुपये का मनी आर्डर इस पते पर भेजे,और भारत के बाहर मन्गाने के लिये भारत से उस देश के लिये लगने वाला डाक खर्च प्रति पान्च सौ ग्राम के हिसाब से भेजे. मेरा पता है:-

रामेन्द्र सिह भदौरिया, 37,पन्चवटी कालोनी,एनबीसी रोड, जयपुर-302006 राज्स्थान-भारत फोन-+91-9414386494

क्या होती है भदावरी ज्योतिष

भदावरी ज्योतिष का नाम सभी ज्योतिष शास्त्रो से अलग है,इसका प्रयोग शकुन शास्त्र के अनुसार किया जाता है,शकुन शास्त्र सामने दिखाई देने वाले भौतिक रूपो के अनुसार ही माने जाते है,जैसे आप किसी स्थान पर जाने वाले है और आप के सामने से कोई बच्चा निकल जाता है,तो वह बच्चा इशारा करता है कि आप अपनी जरूरतो के सामान मे कुछ भूल कर जा रहे है,साथ ही जिस प्रकार से कोई आपके घर आने बाला है,और आप कही बाहर जा रहे है तो घर के बाहर निकलते ही कोई कुत्ता कान फ़डफ़डा देगा,आप खाना खाने बैठते है,और छीक होती है तो आपके लिये सन्देश होता है,कि आप थोडा सा रुक कर खाना खावे,कोई आपके साथ आकर खाना खाने वाला है,दूसरी बात यह है कि अगर खाना खाते हाथ का कौर अपने आप नीचेगिर जाता है,तो अन्दाज लगाया जाता है कि कोई घर का ही आत्मीय व्यक्ति भूखा है । इसी प्रकार से भदावर मे होमोयोपेथिक इलाज के लिये बहुत ही अनौखा प्रयोग चलता है,जन्म तारीख के हिसाब से होम्योपेथी की दवा दी जाती है,जैसे कोई उन्नीस जनवरी से उन्नीस फ़रवरी के बीच मे पैदा हुआ है,उसके लिये किसी ी रोग के लिये एक ही दवा काम करती है,वह है मेट्रामुम्मर,और जो उन्नीस फरवरी से इक्कीस मार्च के बीच मे पैदा हुआ है,उसके लिये एक ही दवा काम करती है,वह है फ़ेरुमफ़्रास,इक्कीस मार्च से उन्नीस अप्रैल के बीच पैदा हुआ होता है उसके लिये है,केलीफ़ास,उन्नीस अपरैल से बीस मई के बीच जो पैदा हुआ होता है उसके लिये,मेट्रुम्सल्फ़,बीस मई से बीस जून के लिये,कालेमुरे,इक्कीस जून से बाइस जुलाई के लिये कालकेरिया फ़्लोर,बाईस जुलाई से बाईस अगस्त के बीच बालो के लिये है,मेगनेसिया फ़ोस,बाईस अगस्त से २३ सितम्बर बालो के लिये है,कालेसल्फ़,तेइस सितम्बर से तेइस अक्टूबर बालो के लिये है,नेट्रुम्फ़ास,तेइस अक्टूबर से बाईस नबम्बर के लिये है,कालकेरिया सल्फ़,बाईस नबम्बर से इक्कीस दिसम्बर बालो के लिये है,साइलेसिया,और इक्केस दिसम्बर से इक्कीस जनवरी वालो के लिये है,केलकरिया फ़ास । इस प्रकार से पुराने लोगो ने भदावर मे अपने ग्यान का भन्डार तो बहुत किया था,मगर साधन नही होने से भदावरी लोग उस ग्यान को किसी को बता नही पाये,मगर पीढी दर पीढी वह ग्यान चलता रहा,और एक सीमित क्षेत्र मे वह ग्यान रह पाया,भदावरी ज्योतिष को सबसे अधिक नुकशान सिन्धिया और मराठा परिवारो ने दिया,राज्य की चाहत से इन लोगो ने भदावर के कानपुर से आगरा,मैनपुरी,और फ़र्रुखाबाद की सीमा क्षेत्रो मे भदावर राज्य के भदौरिया बिरादरी को समाप्त कर दिया था,केवल आठ लोग बचे थे,जिनको दिल्ली मे बुलाकर बडे भाई के नही पहुन्चने के कारण छोटे को ही पगडी बान्ध दी गई थी,भदावर मे ज्योतिष के लिये लोग जन्म पत्री पर कम ही विश्वास करते थे,वे शक्ल देख कर ही आदमी की पहिचान करते थे,और शक्ल देखने का जो उनका तरीका था वह बहुत ही नायाब था,उनकी एक पुरानी कहावत आदमी को पहिचानने की जो थी,बहुत ही कामयाब बात है और आज भी एक सौ एक टका खरी उतरती है:-सौ मे सूर,सहस मे काना,एक लाख मे एन्चक ताना,एन्चक ताना करे पुकार,कन्जे से रहियो हुसियार,जाके हिये न एकहु बार,ताको कन्जा ताबेदार,छोट गरदना को अखित्यार,कहा करे छाती को बार । इस पूरी भदावरी कहावत का अर्थ इस प्रकार से है:-सौ आदमी को अपनी बातो से अन्धा आदमी चला सकता है,पागल बना सकता है,उसकी बिना आन्खो की समझ फ़टाफ़ट अन्दाज लगा कर आगे की स्थिति को जान लेती है,एक हजार आदमी को काना जिसके एक आन्ख होती है,चला सकता है,और एन्चक ताना उसको कहते है जो बात को पूरी कहने से पहले ही उस बात को अपने द्वारा कहने लगता है,बात सुरू कोई करता है और एन्चक ताना अपनी आदत से उस बात को लोगो को अपने द्वारा कहने के चक्कर मे बात को ही खीन्च कर कहने बाले को चुप करा देता है,जिसकी आन्खे भूरी होती है,आन्ख की पुतली बीच मे पीली होती है,उसकी आदत के लिये कहा गया है,कि वह कब और क्या कर दे किसी को पता नही होता,जिस प्रकार से बिल्ली दिन मे दिखाई नही देती और घात लगाकर पता नही कब दूध फ़ैला देती है,चूहा जो कितना चालाक जीव है,झपट कर पकड लेती है,चिडिया पन्ख वाली है,और जमीन पर बैठते ही पर नोच डालती है,कन्जा आदमी उसी प्रकार का होता है,लेकिन उससे भी खतरनाक वह आदमी होता है,जिसके छाती मे बाल नही होता है,इतना बडा नाटक कर जाता है कि सामने वाला चलाकर अपना माल उसको दे देता है,बिना छाती के बाल वाला आदमी कभी विश्वास लायक नही होत है,लेकिन सन्सार मे जिसकी गर्दन कन्धो से मिली होती है,वह आप के पेट मे बैठ कर आपका भेद ले जायेगा,आपके साथ हन्सेगा,वक्त पर रोयेगा,ऐसा लगेगा कि यह आपके लिये जान दे देगा,मगर आप के घर मे ही रह कर आप का सत्यानाश करके चला जायेगा,आपको पता भी नही चलेगा.इस प्रकार की भदावरी ज्योति्ष को किस प्रकार से लोग नतमस्तक नही होन्गे.

बारह बातो से ही बारह राशियो का बखान

भदावर के लोगो की बाते ही आपको बारह भावो की कहानिया कह कर बता देन्गी कि ज्योतिष के बारह भाव क्या होते है,लोग ज्योतिष को पढने के लिये हजारो रुपया खर्च कर देते है,फिर भी उनको गुणा भाग करने के कारण ज्योतिश समझ मे नही आती है,भदावरी तरीका से आप कितनी जल्दी ज्योतिष के बारह भावो को सेख जायेन्गे आपको भी पत अनही चलेगा.

"मै और मेरे पास है,मै सोचू करू महसूस,मै जीतून्गा,बिलगाव करून्गा,तौलून्गा,इच्छा भी होगी,फ़िर भी देखून्गा,अन्जवा करके,जानता भी हू,विश्वास भी है" इन चन्द शब्दो के अन्दर बारह भावो का अर्थ छुपा है,आप को सीधे से बाताता हू,पहला शब्द है "मै" लगन मे केवल एक ही व्यक्ति का भाव होता है,लगन के बाद जो भी जातक के पास चल या अचल धन होता है,उसे ही वह कह सकता है,कि मेरे पास है,तीसरे भाव से किसी बात को सोचा जाता है,चौथा भाव दिमागी रूप से महसूस करता है,पान्चवा भाव ही बताता है कि जिन्दगी मे जीतना या हारना है,छठा भाव ही कर्जा दुशमनी से और बीमारी से अलग करता है,सातवा भाव अच्छा या बुरा का भेद जानने के लिये माना जाता है,किसी भी बात या वस्तु को तौल कर ही कहा जाता है,बेलेन्स करना सातवे भाव की बात होती है,मन की जो भी इच्छाये होती है,आठवा भाव ही बताता है,नवा भाव आगे के जीवन के लिये अपनी राय देता है कि कार्य करने से पहले देखना पडता है,और जब किसी कार्य को किया जाता है तो वह एक प्रकार से प्रयोग ही तो होता है,प्रयोग करने के बाद कार्य ठीक से किया गया है तो फल भी ठीक मिलेगा और बुरी तरह से किया गया है तो फल भी ठीक नही मिलेगा,और जब काम कर लिया जाता है तो फल का पता हो जाता है,उसी बात को कोई क ह सकता है,कि उसके बारे मे जानता है,और जब किसी काम के बारे मे जान लिया जाता है तो बारहवा भाव बताता है कि जिस काम को किया जा रहा है उसके बारे मे पूरा ग्यान है ।इस प्रकार से भदावरी ज्योतिष मे डेढ लाइन मे पूरी ज्योतिष की जानकारी मिल जाती है ।

हमारी बाते आपको अन्य की तरह से शब्दो मे नही उलझायेन्गी,बल्कि आपके बारे मे पूरा हाल बतायेन्गी,वह भी शत प्रतिशत सही !

कितने ही लोग बिना मेहनत किये ही,बिना कुछ समझे बूझे ही आपकी जन्म तारीख को कम्प्यूटर के सोफ़्टवेयर मे डाल कर जो भी कम्प्यूटर बताता है आपको लिख कर भेज देते है,उनका काम आपको बातो मे उलझाना होता है,मेरे पास ऐसा कुछ नही है,मै तो चार बातो को जीवन के लिये माफ़िक है,और आपकी कुन्डली जो बताती है,उसका ही फल आपको बताते है,साथ ही आपको बुरा लगे या भला,जो है वही बताऊन्गा,लाग लपेट वाली बाते तो और कही से भी जान सकते है,मन्गल और राहु का सन्ग बिजली की मोटर तभी बनता है जब कि बुध साथ हो,मन्गल मन्गल के घर मे है,और राहु भी मन्गल के साथ सही रूप मे बैठा है,तो बिजली की मोटर से काम नही चलेगा,वहा पर मेष राशि के मन्गल राहु से डाक्टर,बुध साथ है तो क्लीनिक,का मालिक और सूर्य की नजर है तो सरकारी डाक्टर,और किसी प्रकार से होरा,दिन या रात का जन्म और शनि की छाया है तो वह कर्जा लेकर अपनी जीवन नैया को चलाने बाला होगा.